Thursday, November 30, 2023
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यमुना को प्रदूषणमुक्त करने सात समुंदर पार शुरू हुआ कैंपेन, प्रवासी भारतीयों की पहल

यमुना को प्रदूषणमुक्त करने सात समुंदर पार शुरू हुआ कैंपेन, प्रवासी भारतीयों की पहल

बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली यमुना के प्रदूषण को लेकर सात समुंदर पार रहने वाले प्रवासी भारतीय भी चिंतित हैं। यह चिंता उस समय ज्यादा बढ़ जाती है जब ये भारतीय अपने धर्म स्थलों का दर्शन करने स्वदेश आते हैं और ऑक्सीजन रहित यमुना के जल को देखकर भावुक हो जाते हैं। यमुना को प्रदूषणमुक्त करने के लिए ये भारतीय लंदन में ऑनलाइन कैंपेन चला रहे हैं, इसी के तहत ऑनलाइन पीटिशन भी शुरू की गई है, जिसके जरिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालने की कोशिश की जाएगी, ताकि यमुना को प्रदूषणरहित करने के लिए ब्रिटिश सरकार तकनीकी तौर पर भारत सरकार का सहयोग करे। प्रवासी भारतीयों के इस अभियान में वहां के स्थानीय सांसदों का भी सहयोग मिल रहा है।  इंग्लैंड में गुजरात से संबंध रखने वाले राकेश राजपारा और साधना बेन नामक महिला ने ‘हेल्प असिस्ट इन रिजुविनेटिंग द सैक्रेड होली यमुना रिवर कैंपेन यूके’ नाम से अॉनलाइन पीटिशन शुरू किया है। राकेश राजपारा कहते हैं, ‘10 हजार हस्ताक्षर होने पर इंगलैंड की सरकार इसे स्वीकार करेगी और एक लाख हस्ताक्षर पूरा होने पर इस पर चर्चा करने का विचार होगा।’ इस अभियान को स्थानीय काउंसिलर मंजुला सूद, लिसेस्टर ईस्ट से ब्रिटिश लेबर पार्टी के संसद कीथ वॉज, लॉर्ड मेयर रश्मिकांट जोशी का भी समर्थन प्राप्त है। आस्था का केंद्र है यमुना- पीटिशन में कहा गया है कि पूरी दुुनिया के लाखों श्रद्धालु भारत में बहने वाली पवित्र यमुना नदी के वृंदावन, मथुरा और गोकुल में पूजा करने आते हैं। इस नदी से हम सभी की आस्था जुड़ी है। लेकिन आज यह नदी बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गई है। संयुक्त राष्ट्र संघ इस नदी को मृत घोषित कर चुका है। नदी में ताजा पानी नहीं है। श्रद्धालुओं को नदी के गंदे पानी में पूजा करने को मजबूर होना पड़ता है। तकनीकी सहयोग करे ब्रिटिश सरकार- बुद्धादर्शन से बातचीत में साधना बेन कहती हैं कि कैंपेन के जरिए हम UK Govt.  से निवेदन कर रहे हैं कि नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए भारत सरकार का सहयोग करे। ताकि यमुनोत्री से इलाहाबाद तक स्वच्छ पानी का बहाव हो। यमुना नदी, एक नजर: लंबाई - 1376 किलोमीटर दिल्ली में कुल लंबाई- 46 किलोमीटर दिल्ली में यमुना का प्रदूषित हिस्सा- वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक 22 किलाेमीटर Zero oxygen in yamuna in Delhi- दिल्ली में यमुना में 17 नालों के जरिए औद्योगिक एवं घरेलू कचरा गिरता हैं। राजधानी में 1600 से ज्यादा अनॉधिकृत कॉलोिनयां हैं, जिनमें से अधिकांश में अभी तक सीवर लाइन नहीं डाली गई है। इन कॉलाेनियांे का अधिकांश कचरा नालों के जरिए नदी में प्रवाहित होता है। इसकी वजह से वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज के बीच 22 KM के दायरे में Oxygen की मात्रा zero है। Help Assist in Rejuvenating the Sacred Holy Yamuna River Yamuna River (India), is worshipped by millions of devotees all around the world through pious banks of Vrindavan, Mathura and Gokul. The river has many spiritual significance to all. This very river is polluted with toxic industrial and domestic waste from Delhi and other drains United Nation has declared the Yamuna River dead. There is no fresh flow, flowing through whole stretch. Devotees are forced to take a sip, bath and perform religious activities in these toxic polluted waters. We urge the UK Government to assist the Indian Government to treat their Industrial and Domestic waste and not to pour treated or untreated waste water into Yamuna River. Furthermore ensure adequate natural flow of fresh water throughout the stretch,which starts from Yamunotri to Allahabad Please sign this petition here - https://petition.parliament.uk/petitions/200950

पीपल, पाकड़ जैसे देसी पेड़ों से सुधरेगी नदियों की दशा

पीपल, पाकड़ जैसे देसी पेड़ों से सुधरेगी नदियों की दशा

नदियों किनारे लगाए  जाएंगे करोड़ो पौधे बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली गंगा और उसकी सहायक नदियों की दशा सुधारने के लिए नदियों किनारे एक करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। नदियों किनारे विशेष तौर पर पीपल, पाकड़, आम, नीम, बरगद इत्यादि के अलावा औषधीय पौधे लगाए जा रहे हैं। लखनऊ में आयोजित ‘रैली फॉर रिवर्स’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में नदियों को मां का स्थान प्राप्त है। नदियों की दशा सुधारने के लिए राज्य सरकार द्वारा उनके किनारे बड़ी संख्या में वृक्षारापेण किया जा रहा है। सद्गुरु ने कहा कि हमारी नदियां हमारी धरोहर हैं और हमारी प्राणदायिनी भी हैं। सद्गुरु की संस्था ईशा फाउंडेशन द्वारा लखनऊ में आयोजित  ‘रैली फाॅर रिवर्स’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की अवैज्ञानिक सोच की वजह से आज नदियों को बचाना एक चुनौती हो गयी है। अब समय आ गया है कि हम सब नदियों को बचाने के लिए अभियान स्वरूप काम करें, ताकि हमारा भविष्य सुरक्षित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नदियों को बचाने के लिए ‘नमामि गंगे’ परियोजना के तहत 20 हजार कराेड़ रुपए की व्यवस्था की है।

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