April 21, 2018

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पहले थें सीमेंट कंपनी के प्रेसिडेंट, अब गांव में साइंस गुरू बन गए पटेल राजेंद्र प्रसाद

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-रिटायर्ड लोग साइंस गुरू से लें प्रेरणा  

बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली

जो लोग रिटायरमेंट के बाद जीवन को डूबता सूरज की नजर से देखने लगते हैं, उनके लिए पटेल राजेंद्र प्रसाद सर, एक उजाले की तरह हैं। ऐसे लोग राजेंद्र प्रसाद के जीवन से प्रेरणा लेते हुए खुद को ऊर्जावान बना सकते हैं।

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के रामपुर ढबही गांव (स्माईल पिंकी का गांव) के निवासी पटेल राजेंद्र प्रसाद जिंदल सीमेंट कंपनी में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के पद से पिछले साल रिटायर्ड हुए। हालांकि 60 साल पूरा होने के बावजूद कंपनी राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल बढ़ाना चाहती थी। अन्य सीमेंट कंपनियां भी राजेंद्र प्रसाद को नौकरी का ऑफर दिया, लेकिन राजेंद्र प्रसाद ने रिटायरमेंट के बाद अपनी बुजुर्ग मां की सेवा करने और ग्रामीण युवाओं को सही मार्गदर्शन देने के लिए गंगा किनारे स्थित अपने पैतृक जिला मिर्जापुर को अपनी कर्मस्थली बनाने का फैसला किया और पिछले एक साल की कड़ी मेहनत और लगन से आपको मिर्जापुर से नेशनल साइंस कांग्र्रेस के लिए चुना गया है। इसके अलावा आपको जिला साइंस क्लब का स्थायी स्पीकर बनाया गया है।

अमूमन देखा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद अधिकांश लोगों की दिनचर्या खराब हो जाती है, जिसकी वजह से ऐसे लोगों का स्वास्थ्य भी खराब होने लगता है। ऐसे लोगों को राजेंद्र प्रसाद से प्रेरणा लेने की जरूरत है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद भी सही ढंग से जीवन का सदुपयोग कर सकें और खुद को स्वस्थ रख सकें।

बेल्लारी में लगाए 15 हजार नीम के पौधे- 

राजेंद्र प्रसाद ने सूरत से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश समय महाराष्ट्र, कनार्टक में 35 सालों तक उच्च पदों पर नौकरी की। पर्यावरण के प्रति लगाव की वजह से राजेंद्र प्रसाद ने नौकरी पीरियड के दौरान बेल्लारी में 15 हजार नीम के पौधे लगाए। इसके अलावा अन्य विभिन्न देसी प्रजाति के पौधों को भी लगाया।

गांव में खोले डेयरी फार्म- 

रिटायरमेंट के बाद राजेंद्र प्रसाद ने गांव में गौशाला खोले हैं। सोलर पैनल भी लगाए हैं। जल्द ही युवाओं के लिए सस्ती दर पर कोचिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा गोबर गैस संयंत्र, मेडिसिनल प्लांट भी लगाएंगे।

छात्रों को करते हैं मोटिवेट-

इन सभी कार्याें के अलावा राजेंद्र प्रसाद अपने बचे हुए समय में विभिन्न स्कूलों में जाकर छात्रों को मोटिवेट करते हैं। उन्हें बदलते समय के साथ एजुकेशन फिल्ड में आने वाली चुनौतियां, पर्यावरण इत्यादि के बारे में बताते हैं।

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