October 23, 2018

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पूर्वी उत्तर प्रदेश के आखिरी छोर पर है महर्षि भृगु की तपोभूमि ‘बलिया’

Buddhadarshan News, Ballia

रेलवे स्टेशन से मात्र एक km की दूरी पर स्थित है भृगु मंदिर

उत्तर प्रदेश के पूर्वी छोर पर महर्षि भृगु की तपोभूमि बलिया स्थित है। बलिया शहर के अंदर रेलवे स्टेशन से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर महर्षि भृगु का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। मंदिर के अंदर महर्षि भृगु के प्रिय शिष्य दर्दर मुनि की प्रतिमा भी स्थापित है।

प्रतिवर्ष बलिया में कार्तिक पूर्णिमा से दर्दर मुनि के नाम पर देश भर में प्रसिद्ध ददरी मेला का आयोजन होता है। आज के बदलते दौर में भी प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु ददरी मेला देखने आते हैं। यह मेला अगले 15 दिनों तक चलता है। मेले में अन्य राज्यों के व्यापारी भी भाग लेते हैं।

कार्तिक पूर्णिमा के दिन शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर गंगा तट पर स्नान करने के लिए भारी संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के श्रद्धालु आते हैं।

प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के कार्यकाल 1990 में भृगु मंदिर परिसर को आकर्षक बनाकर इसे पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करने की पहल शुरू हुई।

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मंदिर के अंदर महर्षि भृगु की है समाधि स्थल:

इस ऐतिहासिक मंदिर के अंदर महर्षि भृगु की समाधि स्थल है, मंदिर से सटे परिसर में चित्रगुप्त का भी मंदिर निर्मित किया गया है।

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विष्णु की छाती पर पैर से किया था आघात:

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार साधु-मुनियों के बीच इस बात का विवाद छिड़ गया कि त्रिदेवों (ब्रह्मा-विष्णु-महेश) में श्रेष्ठ कौन है, तीनों देवताओं की परीक्षा के लिए साधु-मुनियों ने महर्षि भृगु को जिम्मेदारी दी। महर्षि भृगु ने तीनों देवाताओं की परीक्षा ली, इस दौरान भगवान शंकर और भगवान ब्रह्मा ने महर्षि भृगु का अपमान किया, लेकिन जब महर्षि भृगु भगवान विष्णु के पास गए तो उस समय विष्णु जी विश्राम कर रहे थें। महर्षि भृगु ने जाते ही अपने दाहिने पैर से भगवान विष्णु की छाती पर प्रहार किया। लेकिन महर्षि के इस प्रहार के बदले विष्णु जी ने तुरंत उठकर महर्षि भृगु के पैर पकड़ लिए और कहा, भगवन, मेरी कठोर छाती से आपके कोमल पैर को चोट तो नहीं आई। विष्णु जी के ऐसा कहते ही महर्षि भृगु प्रसन्न हुए और उन्होंने विष्णु जी को तीनों देवताओं में श्रेष्ठ घोषित कर दिया।

कैसे जाएं:

रेल मार्ग:

आप बलिया बस अथवा ट्रेन अथवा टैक्सी के जरिए जा सकते हैं। बलिया रेलवे स्टेशन से महज एक किलोमीटर की दूरी पर मंदिर स्थित है। राजधानी एक्सप्रेस के अलावा अन्य एक्सप्रेस ट्रेनें भी इस मार्ग से गुजरती हैं। बलिया देश के महत्वपूर्ण महानगर दिल्ली, मुंबई, कोलकत्ता रेलमार्ग से भी जुड़ा है।

बस मार्ग:

बलिया शहर बस मार्ग के जरिए वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, कोलकत्ता, पटना से जुड़ा है।

हवाई मार्ग:

बलिया आने के लिए आपको देश के किसी भी हिस्से अथवा विदेश से हवाई मार्ग के जरिए पहले वाराणसी आना पड़ेगा। वाराणसी से आपको टैक्सी अथवा बस या ट्रेन के जरिए बलिया पहुंचना होगा। आने वाले समय में आप जलमार्ग के जरिए भी बलिया पहुंच सकते हैं।

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