November 24, 2017

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यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क की तरह नेपाल में भी खुलेगा पार्क

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी ने किया यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क का दौरा  

सुनीता सिंह, नई दिल्ली    

बंजर भूमि को उर्वर बनाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए नेपाल सरकार भारत से सहयोग ले सकता है। नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी ने मंगलवार को यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क का दौरा किया और वहां पर विकसित किए गए पौधों और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी ली। इस मौके पर उन्होंने यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में महुआ का एक पौधा भी लगाया। इस मौके पर राष्ट्रपति महोदया के साथ नेपाल मंत्रिमंडल की टीम भी थी।

नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी ने पार्क के बड़े वेटलैंड में स्थानीय जलीय पक्षियों को भी देखा। वैज्ञानिक तरीके से विकसित इस पार्क को देखकर राष्ट्रपति महोदया काफी प्रसन्न हुईं और यहां के वैज्ञानिकों को बधाई दीं। इस मौके पर राष्ट्रपति विद्या देवी ने कहा कि पर्यावरणीय सुरक्षा अहम है। बता दें कि विद्या देवी पूर्व में नेपाल में पर्यावरण मंत्री रह चुकी हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के साइंटिस्ट प्रो.सीआर बाबू ने राष्ट्रपति विद्या देवी भण्डारी को बायोडायवर्सिटी पार्क के जैव विविधिता एवं महत्व के बारे में विस्तार से बताया। सेंटर में बनी गैलरी को भी राष्ट्रपति महोदया ने उत्सुकतापूर्वक समझा। पार्क के इंचार्ज और यहां पर साइंटिस्ट डॉ.फैयाज खुद्सर ने पार्क की खाद्य श्रृखंला एवं पौधे-जानवरों के आपसी तालमेल को विस्तार से बताया। उन्हें नम भूमि के पुर्नस्थापित करने की सारी प्रक्रिया विस्तार में बतायी गई अौर अप्रवासी पक्षियों के पर्यावास के बारे में जानकारी दी। यहां पर विदेशी पक्षी भी आती हैं। डॉ.फैयाज खुद्सर कहते हैं कि महुआ के पेड़ को ‘जीवन का प्रतीक’ कहा जाता है। इसके प्रत्येक हिस्से का हमारे जीवन में उपयोगी है।

यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क, एक नजर:

उत्तरी दिल्ली के वजीराबाद गांव के पास इस पार्क को विकसित करने का काम शुरू किया गया है। पहले चरण में लगभग 157 एकड़ क्षेत्र में बायो-डायवर्सिटी पार्क विकसित किया जा चुका है। यहां दो वेट लैंड विकसित किए गए हैं। ये वेट लैंड छोटे हैं।

दूसरे चरण में लगभग 300 एकड़ क्षेत्र में बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने का काम कुछ साल पहले शुरू किया गया था।  यह क्षेत्र बंजर था, लेकिन आज यहां झील है। दिल्ली में भूजल स्तर लगातर नीचे गिरता जा रहा है। ऐसे में यह वेट लैंड भूजल रिचार्ज का अहम स्रोत साबित होगा। इतना ही नहीं, गर्मियों में जब यमुना सूखने लगती है तब यह पानी यमुना को भी रिचार्ज करेगा।

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